खजुराहो नृत्य समारोह में सुर, लय, ताल का हुआ संगम, मणिपुरी डांस के साथ हुआ समापन

 खजुराहो

मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो में आज की शाम बसंत और फागुन अपने शबाब पर थे। 48वें खजुराहो नृत्य समारोह के आखिरी दिन सुर, लय, ताल, नृत्य, संगीत और रंगों का ऐसा संगम हुआ कि बसंत कब फागुन में बदल गया इसका आभास ही नहीं हुआ।

कथक और भरतनाट्यम ने लुभाया
सुखद अहसासों से लबरेज इस रंगीन शाम में भोपाल की श्वेता और क्षमा की जोड़ी से लेकर कथक की जानी-मानी हस्ती शमा भाटे ने ऐसे अद्भुत रंग भरे जिसका बखान करना मुश्किल है। आखिरी प्रस्तुति के रूप में सुदूर उत्तर पूर्व भारत के मणिपुरी नर्तकों ने तो कमाल ही कर दिया। इन्हीं प्रस्तुतियों के साथ 48वें खजुराहो नृत्य समारोह का शानदार समापन हो गया। नृत्य समारोह के आखिरी दिन की पहली प्रस्तुति के रूप में कथक और भरतनाट्यम की जुगलबन्दी पेश की गई।

नर्मदा की स्तुति
भोपाल की भरतनाट्यम नृत्यांगना श्वेता देवेंद्र और कथक नृत्यांगना क्षमा मालवीय ने अपने ग्रुप्स की 14 नृत्यांगनाओं के साथ अद्भुत नृत्य प्रस्तुति दी। दोनों ने नर्मदा जी की स्तुति से शुरुआत की। रागमालिका के तमाम राग़ों को पिरोकर तैयार की गई इस स्तुति के बोल थे-'नमो नर्मदाय निजानंदाय'। आदि और तीनताल में निबद्ध इस रचना में नर्मदा जी के 10 नामों को भाव नृत्य से प्रस्तुत किया गया। भाव नृत्य की प्रस्तुति में दोनों नर्तकियों का अद्भुत संगम देखने को मिला।  सूरदास के पद ‘सुंदर श्याम सुंदसर लीला सुंदर बोलत बचन’ कथक और भरतनाट्यम का सुंदर रूप उभरकर सामने आया। इसी के साथ कथक और भरतनाटयम को एकाकार करते हुए इस प्रस्तुति का समापन हुआ।
 

कृष्ण और गोपियों का प्यार
नृत्य समारोह का ओजपूर्ण और जोशीला समापन इम्फाल से आये मणिपुरी नृत्य समूह 'तपस्या' के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मणिपुरी नृत्य से हुआ। नृत्य का आगाज़ नट संकीर्तन से हुआ। यह पूजा का एक रूप है, जो महायज्ञ के रूप में माना जाता है। यह श्रीमद भागवत के सौंदर्य तत्व को प्रदर्शित करता है। मणिपुरी शैली में नर्तकों ने पुंग और करताल के साथ मंद अभिनय और नृत्य संगीत के साथ इसे पेश किया। यूनेस्को ने मणिपुरी नृत्य संकीर्तन को अपनी प्रतिनिधि सूची में जगह दी है। अगली प्रस्तुति 'एको गोपी एको श्याम' की रही। इस प्रस्तुति में कृष्ण के प्रति गोपियों के प्यार को बड़े ही उदात्त और मार्मिक ढंग से पेश किया गया। 

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