रूस-यूक्रेन युद्ध का नहीं बढ़ेगा दायरा, दो दिनों में कब्जा कर सकती है रूसी सेना
नई दिल्ली
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध लंबा नहीं चलेगा। नाटो सेनाओं के यूक्रेन की मदद के लिए नहीं आने से यह खतरा टल चुका है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अगले एक-दो दिनों के भीतर यूक्रेन को अपने कब्जे में लेने में सफल हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रूस की सेना यूक्रेन की राजधानी कीव में घुस चुकी है। जिस प्रकार से यूक्रेन पुलों को तोड़कर सेना को रोकने की कोशिश कर रहा है, उससे भी स्पष्ट है कि अब बहुत ज्यादा समय तक वह लड़ने की स्थिति में नहीं है।
यूक्रेन की रणनीतिक चूक
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टनेंट जनरल राजेन्द्र सिंह ने कहा कि यह यूक्रेन की रणनीतिक चूक है। वह अमेरिका और नाटो देशों के झांसे में फंस गया। सिंह के अनुसार, आज कोई देश युद्ध तभी लड़ सकता है, जब वह खुद इसमें सक्षम हो या फिर कोई और देश या देशों का समूह उसकी मदद कर रहा हो। अमेरिका या नाटो देश यूक्रेन को मदद की बात कह रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी भी नहीं कहा कि वे यूक्रेन के मदद के लिए सेना भेजेंगे। यूक्रेन को भी इन तथ्यों पर गौर करना चाहिए था।
दो दिनों में पूरी तरह यूक्रेन पर हो सकता है कब्जा
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दो दिनों के भीतर रूस पूरी तरह से यूक्रेन पर कब्जा कर सकता है। इसके बाद युद्ध खत्म हो जाना चाहिए। लेकिन, देखना यह होगा कि रूस का इरादा क्या है ? क्या वह यूक्रेन में अपनी पसंद की सरकार गठित करना चाहता है या फिर यूक्रेन को अपना हिस्सा बनाता है। ज्यादा संभावना यही है कि वह मौजूदा सरकार को हटाकर रूस समर्थित सरकार का गठन करेगा।
यूक्रेन के नाटो में शामिल होने को लेकर रूस का चिंतित होना लाजिमी
सिंह ने कहा कि यूक्रेन के नाटो में शामिल होने को लेकर रूस का चिंतित होना लाजिमी है, क्योंकि अमेरिका पहले ही पूर्वी यूरोप के 11 देशों को नाटो में शामिल कर चुका है। यूक्रेन के शामिल होने के बाद रूस के लिए यह खतरा और बढ़ जाता है। इसे उसी रूप में देखना चाहिए, जैसे चीन के डोकलाम में घुसने से भारत के लिए खतरा पैदा हो गया था। उन्होंने कहा कि रूसी सेना के चेरनोबिल परमाणु केंद्र पर कब्जा करना एक सामान्य घटना है। एक तो यह रूसी सेना के रास्ते में पड़ता है। दूसरे इसमें परमाणु कचरा मौजूदा है, जिसे प्रोसेस करके इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए भी रूसी सेना ने इसे कब्जे में लेना बेहतर समझा। इसके अलावा यहां बम से हमला करके भी विकिरण पैदा किए जाने का खतरा था।
