मोबाइल नंबर की तरह बीमा पॉलिसी को भी पोर्ट कराने की मिलेगी सुविधा

नई दिल्ली।

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी के रिन्युअल (नवीनीकरण) से जुड़े नियमों में बदलाव की योजना बना रहा है। इसको लेकर इरडा ने एक्सपोजर ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार, पॉलिसीधारक के जोखिम प्रोफाइल में सुधार होने पर बीमा कंपनियां छूट की पेशकश कर सकेंगी। इसके अलावा एक्सपोजर ड्राफ्ट में स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा गया है। ड्राफ्ट के अनुसार, अब कोई भी बीमा कंपनी पॉलिसीधारक की उम्र के आधार पर पर्सनल दुर्घटना बीमा को लंबी अवधि के लिए रिन्यू करने से मना नहीं कर सकती है। इसी तरह से ड्राफ्ट में बीमा पॉलिसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी के पास पोर्ट करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, बीमाधारक की ओर से पोर्टेबिलिटी फॉर्म मिलने के पांच दिन के भीतर नई बीमा कंपनी, मौजूदा बीमा कंपनी से आवश्यक जानकारी मांग सकेगी। यह बदलाव तय समयसीमा के भीतर बीमा पोर्टेबिलिटी को संभव बनाने के लिए किया जा रहा है।

अभी तक यह था नियम
मौजूदा नियमों के मुताबिक, यात्रा बीमा उत्पादों, व्यक्तिगत दुर्घटना उत्पाद और पायलट उत्पादों को लंबी अवधि के लिए रिन्यू नहीं किया जाता है। जबकि अन्य बीमा उत्पादों को लंबी अवधि के लिए रिन्यू किया जा सकता है। अब इरडा ने व्यक्तिगत दुर्घटना उत्पादों को भी लंबी अवधि के रिन्यूअल के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

छूट भी दे सकेंगी बीमा कंपनियां
इरडा ने ड्राफ्ट में प्रस्ताव रखा है कि पॉलिसीधारक के जोखिम प्रोफाइल में सुधार होने पर बीमा कंपनियां छूट की पेशकश कर सकेंगी। मौजूदा नियमों में ग्राहक के जोखिम प्रोफाइल में सुधार होने पर कंपनियां रिन्यूअल के समय लोडिंग को हटाने का विकल्प देती है। लोडिंग वह अतिरिक्त राशि होती है जो उच्च-जोखिम वाले ग्राहकों से प्रीमियम के रूप में ली जाती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
सिक्योरनाऊ के सहसंस्थापक कपिल मेहता कहते हैं कि इरडा ने विभिन्न प्रकार के बदलाव प्रस्तावित किए हैं। पॉलिसीधारकों के नजरिए से देखें तो व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की लंबी अवधि की रिन्यूअल प्रणाली में लाना काफी महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। पोर्टेबिलिटी से जुड़े प्रस्ताव से बीमा कंपनियों को पुराने दावों से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी। यदि पॉलिसीधारक के स्वास्थ्य या अन्य परिस्थितियों में सुधार होता तो कंपनियां छूट देने के लिए प्रोत्साहित होंगी।

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