जल्द बढ़ सकती है रिटायर्ड डीजी महान भारत की मुश्किलें
भोपाल
करीब तीन साल पुराने एक मामले में रिटायर्ड डीजी महान भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त में करीब एक साल से जांच चल रही है। जांच के दौरान डीजीपी विवेक जौहरी और डीजी होमगार्ड पवन जैन को भी लोकायुक्त में तलब हो चुके हैं। अब यह मामला लगभग फाइनल स्टेज पर है। इसमें एक अन्य रिटायर डीजी के बयान होना बाकी है।
होमगार्ड में करीब तीन साल पहले सैनिकों की टोपी का रंग बदलने को लेकर यह मामला हुआ था। पहले होमगार्ड सैनिकों की वर्दी के साथ लगाई जाने वाली टोपी का रंग खाकी था। बाद में तत्कालीन डीजी महान भारत सागर ने एक आदेश जारी कर सैनिकों की टोपी का रंग नीला कर दिया था। डीजी होमगार्ड ने जब यह फैसला लिया था, तब विभाग के स्टाक में 13 हजार टोपियां रखी हुई थीं। रंग बदलने के कारण उन टोपियों का उपयोग नहीं हो पाया। ऐसा इसलिए कि उनका रंग भी खाकी से नीला नहीं किया जा सकता था। लिहाजा सारी टोपियां स्टाक में रखी रह गई। उपयोग नहीं होने के कारण सरकार को आर्थिक क्षति हुई है। मामले की शिकायत लोकायुक्त में हुई थी और उसकी जांच चल रही है। इसी जांच के सिलसिले में डीजीपी और डीजी होमगार्ड को लोकायुक्त संगठन बुलाए जा चुके हैं। इस मामले में अब एक और रिटायर्ड डीजी के बयान होना है।
बदलने का नहीं था अधिकार
डीजी होमगार्ड को टोपी का रंग बदलने का अधिकार नहीं था। इसको लेकर दो बिंदुओं की शिकायत हुई थी। वर्दी तय करने का अधिकार शासन से होता है। लिहाजा टोपी बदलने का फैसला करने से पहले से शासन से अनुमति लेना थी, लेकिन डीजी ने यह अनुमति नहीं ली थी। वहीं स्टाक में टोपी रखी होने से शासन को आर्थिक क्षति हुई है। बिना अधिकार कोई भी निर्णय लेना पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। इसलिए इस मामले की जांच लोकायुक्त में चल रही है।
