भू-माफियाकी चालबाजी: सरकारी योजना बताकर डेढ़ महीने में काट दी 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनी

ग्वालियर
एक तरफ तेजी से ग्वालियर को स्मार्ट बनाकर सुव्यवस्थित करने कवायद चल रही है। वहीं दूसरी तरफ इस शहर की सूरत बिगाड़ने वाले भू- माफिया अवैध बसाहट कर जेब भरने में जुटे हैं। इस बार शहर में अवैध बसाहट बसाने वालों ने सरकारी स्कीम की आड़ लेकर लोगों की मेहनत की कमाई पर खुलेआम डाका डाल दिया है।
दरअसल ग्वालियर सहित प्रदेश में सरकारी जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया धारणाधिकार नियम के तहत की जा रही है। इसी सरकारी प्रक्रिया का फायदा उठाकर अवैध बसाहट करने वाले कॉलोनाइजर्स ने पिछले डेढ़ महीने में 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां काट दी। खास बात ये कि इन कॉलोनियों में प्लॉट का विक्रय बेचने के लिए भूमाफिया ने धारणाधिकार प्रक्रिया का फायदा उठाया और लोगों को यह प्लॉट इस प्रक्रिया के तहत वैध होने का भरोसा देकर बेच डाले।

कलेक्ट्रेट पहुंचे एक हजार से ज्यादा आवेदन
सरकारी जमीनों को खुर्दबुर्द कर डेढ़ महीने के भीतर 100 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों के काटे जाने के इस मामले का खुलासा तब हुआ जब धारणाधिकार प्रक्रिया के तहत बीते दिनों में करीब एक हजार आवेदन अवैध कॉलोनियों पर प्लॉट लेने वाले लोगों ने किए हैं। हालांकि कलेक्ट्रेट में आए यह आवेदन यह सभी आवेदन रिजेक्ट होने की कगार पर हैं। वहीं धारणाधिकार प्रक्रिया के तहत सरकारी जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को मालिकाना हक देने के लिए बीते लगभग डेढ़ महीने से आवेदन लिए जा रहे हैं। अब तक कुल 15 हजार से ज्यादा आवेदन कलेक्ट्रेट पहुंच चुके हैं। इनमें से करीब 9 हजार आवेदनों की जांच जारी है।

लश्कर क्षेत्र में ज्यादा अवैध बसाहट
लश्कर क्षेत्र के अजयपुर,वीरपुर,गिरवाई क्षेत्र में सरकारी जमीन पर सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां काटी गई हैं। वहीं कैंसर पहाड़ी के नीचे भी बड़ी संख्या में अवैध बसाहट हुई।
ल् झांसी रोड क्षेत्र के सिरोल, डोंगरपुर, अलापुर, महलगांव, सिथौली सहित अन्य गांवों में अवैध कॉलोनियां विकसित हो गई हैं।
ल् मुरार क्षेत्र जड़ेरुआ, गिरगांव, लाल टिपारा, महराजपुरा, नारायणपुर मोहनपुर, बड़ागांव, खुरैरी, बेहटा, बेरजा, पदमपुर खेरिया में अवैध कॉलोनियां विकसित हुई हैं।
ल् शहर के पुरानी छावनी, निरावली, शंकरपुर, जमाहर, मऊ सहित अन्य गांवों में अवैध कॉलोनियां विकसित हुई हैं।

इन विभागों की अनदेखी से बढ़ी अवैध बसाहट
नगर निगम: नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालयों की जिम्मेदारी है कि वह अवैध बसाहटो पर नजर रखे और ऐसा होने पर फौरन उसे रोके, लेकिन लोगों द्वारा शिकायत के बाद भी नगर निगम के जिम्मेदार आंखें बंद किए रहते हैं। नतीजतन इस सांठगांठ से सरकारी जमीनों पर बसाहट हो जाती है।
बिजली कंपनी: सरकारी जमीनों पर कच्चे पक्के मकान बनाने के बाद जरूरी आवश्यकता होती है बिजली की। हैरानी की बात ये है कि बिजली कंपनी ने ऐसे अवैध मकानों में नियम को साइड लाइन कर वैध रूप से कनेक्शन भी दे दिए।
प्रशासन: पिछले साल एक सर्वे के बाद शहर की 700 से ज्यादा कॉलोनियां अवैध पाई गई। इस सर्वे के बाद यह पड़ताल की जानी थी कि यह अवैध कॉलोनियां किस आरआई, पटवारी के रहते हुए विकसित हुईं, लेकिन इसकी पड़ताल भी नहीं हो सकी।

ऐसे समझें किसे मिलेगा धारणाधिकार में मालिकाना हक
नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति अधिनियम 1984 के तहत भू अधिकार पत्र दिये जाएंगे। इस अधिनियम के तहत पात्र व्यक्तियों को ही भू अधिकार पत्र दिये जायेंगे।
शासकीय भूमि पर काबिज व्यक्ति के पास वर्ष 2014 से भूमि पर लगातार कब्जे के प्रमाणीकरण के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
31 दिसंबर 2014 की स्थिति में कम से कम 25 वर्ष से बिना किसी विवाद के शासकीय भूमि पर निवास कर रहे हों।
मकान अथवा दुकान के बिजली अथवा जल प्रदाय के बिल, शासकीय कार्यालय के द्वारा भूखंड के संबंध में जारी दस्तावेज, जनगणना 2011 में दर्ज पता, सम्पत्ति कर की रसीद अथवा मतदाता सूची में दर्ज नाम और पता को मान्य किया जाएगा।
शासकीय आवास पर भूखंड पर किए गए मालिकाना हक के दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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