एमडी की परमिशन बगैर रेत ठेकेदारों की कार्ययोजना बदलने की जांच ठंडे बस्ते में

जबलपुर
राज्य शासन के खनिज विभाग और निगम में साल 2015-16 में रेत खनन में बिना प्रबंध संचालक की अनुमति के कार्य योजना बदलने की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। शासन को करोड़ों रुपए नुकसान वाले इस मामले पर पिछले ही साल मार्च 2021 में प्रबंध संचालक सुखवीर सिंह के निर्देश पर प्रबंध संचालक डॉ. वरदमूर्ति मिश्रा ने एक बार फिर जांच का आदेश जारी कर कमेटी गठित की है। मामला होशंगाबाद में निगम अधिकारी राजीव सक्सेना और कटनी में  एसके दुबे  के प्रभारकाल के दौरान अंतिम लेखों में ठेकेदारों का हिसाब करते समय सामने आई गड़बड़ी से जुड़ा है। इसके बाद अन्य संभाग स्तरीय उप कार्यालय वाले जिलों में भी ऐसी गड़बड़ी की जांच करने कमेटी का गठन किया गया था।  इस मामले में प्रारंभिक गड़बड़ी निगम मुख्यालय की  वित्त शाखा ने ही पकड़ी थी।

दरअसल जिम्मेदार रेत और वित्त अधिकारियों ने इस गड़बड़ी को नजरअंदाज कर पोर्टल पर अपलोड बदली हुई नयी कार्ययोजना के आधार पर ही ठेकेदारों से मासिक किश्त जमा करा ली थी। जांच करने वित्त व रेत शाखा के अधिकारी-कर्मचारियों की एक कमेटी गठित की गई थी जिसने आज तक अपना प्रतिवेदन ही नहीं दिया ।

इनको करना है जांच
इस जांच कमेटी में मुख्य महाप्रबंधक वित्त और लेखा अतुल शर्मा, महाप्रबंधक खान और रेत प्रभारी आशुतोष टेमले, डीएस बघेल महाप्रबंधक भौमिकी, अनिल खंडेलवाल वरिष्ठ प्रबंधक लेखा, एससी नेमा तथा बालाराम मेहरा प्रबंधक सामान्य व उच्च श्रेणी लिपिक प्रथम को शामिल किया गया है। इस संबंध में पूछे जाने पर जांच अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि साल में एक बार कार्ययोजना बदलने का प्रावधान निविदा की शर्त में था ,जबकि ऐसा प्रबंध संचालक की अनुमति बगैर नहीं होगा यह इस  निविदा की प्रमुख शर्त में था इस पर कोई कुछ  नहीं बोल रहा, न ही लिखित में प्रतिवेदन दिया जा रहा है।

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