महंगे पेट्रोल और अधिक कीमत ने घटाई ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों की सेल

नई दिल्ली।  

देश में दोपहिया के बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री लगातार घटती जा रही है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र में दोपहिया की बिक्री 1.45 करोड़ रहने की उम्मीद है, जो एक दशक का सबसे निचला स्तर होगा। इसकी एक बड़ी वजह ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आमदनी घटना है। जनवरी में भी दोपहिया वाहनों की बिक्री में 13.5 फीसदी की गिरावट आई है। उद्योग अब अप्रैल-जून में शादी-विवाह के सीजन में ही बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

कोरोना और बेमौसम बारिश ने घटाई कमाई
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की कमाई पर कोरोना बेमौसम बारिश का असर पड़ा है। कोरोना की पहली लहर के बाद एक तरह स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है। वहीं बेमौसम बारिश ने किसानों के साथ ग्रामीण कामगारों की आमदनी पर असर डाला है। दूसरी लहर से शहरी क्षेत्र के लोग बेहतर तरीके से निपटे। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग कम साधन की वजह से ऐसा कर पाने में पूरी तरह सफल नहीं हुए जिससे उनकी कमाई घट गई। ऐसी स्थिति में दोपहिया की खरीद में बड़ी गिरावट आई।
 

शहरी क्षेत्र में महंगे बाइक की बिक्री बढ़ी
ग्रामीण क्षेत्र में दोपहिया की खरीद जहां जरूरत के लिए की जाती है। वहीं शहरी क्षेत्रों में ज्यादातर खरीदारी बेहतर वाहन की चाहत और नए मॉडल पसंद आने की वजह से होती है। यही वजह है कि मेट्रो शहरों के साथ पहली और दूसरी श्रेणी के शहरों में महंगी और प्रीमियम बाइक की बिक्री में उछाल आया है। हालांकि, दोपहिया की बिक्री में महंगी बाइक की हिस्सेदारी महज 20 फीसदी है। शहरी क्षेत्रों में कारों की बुकिंग भी तेजी से हो रही है और एक ग्राहक जल्दी वाहन हासिल करने के लिए कई स्थानों पर बुकिंग करा रहे हैं।

वाहन कंपनियों ने कई बार बढ़ाए दाम
पिछले दो साल में इस्पात समेत अन्य कच्चे माल की लागत बढ़ने से दोपहिया कंपनियों ने कई बार कीमतों में इजाफा किया है। इससे इनकी कीमत बढ़ गई है। दूसरी ओर देश के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। ऐसे में आमदनी घटने के बीच महंगे ईंधन और वाहनों की ऊंची कीमत की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं ने दोपहिया की खरीद से दूरी बना ली है।

डेलॉयट इंडिया के साझेदार एवं ऑटोमोटिव प्रमुख राजीव सिंह के मुताबिक, उपभोक्ताओें की बदलती जरूरतों और नवाचारी खोज सामने आने से भारतीय वाहन उद्योग वृद्धि का नया दौर देखने जा रहा है। आने वाले समय में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों, खासकर दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों की वृद्धि को मजबूती मिलेगी।

उपभोक्ताओं में इलेक्ट्रिक वाहनों की दिलचस्पी बढ़ी: डेलॉयट
भारत में अब आवागमन वाले वाहनों का रुझान बदल रहा है और ज्यादा उपभोक्ता इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। बहुत कम समय में दोपहिया की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक दोपहिया की हिस्सेदारी दो फीसदी पहुंच गई है। डेलॉयट की वैश्विक ऑटोमोटिव उपभोक्ता अध्ययन रिपोर्ट, 2022 के मुताबिक एक-तिहाई से अधिक भारतीय उपभोक्ताओं ने इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों के प्रति दिलचस्पी दिखाई है। इसके मुताबिक, भारत में पर्यावरण-अनुकूल और महामारी की वजह से टिकाऊ परिवहन साधनों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, 59 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ता जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण स्तर और पेट्रोल एवं डीजल वाहनों के उत्सर्जन को लेकर फिक्रमंद हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों में भारतीय उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि का पता चलता है क्योंकि वे उत्सर्जन एवं प्रदूषण में कमी लाने में मददगार होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, हरित प्रौद्योगिकी वाले वाहनों को बढ़ावा देने की घोषणा बजट 2022-23 में भी की गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों की अदला-बदली की सुविधा चार्जिंग स्टेशनों पर देने से इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ेगा।

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