कांग्रेस ने चन्नी को घोषित किया सीएम उम्मीदवार, रेस से बाहर हुए नवजोत सिद्धू
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस ने मौजूदा सीएम चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को अपना सीएम उम्मीदवार घोषित किया है। इस रेस में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu ) भी शामिल थे। लेकिन वे पीछे रह गए। कांग्रेस (Congress) हाईकमान ने पहले ही चन्नी को ही सीएम फेस बनाने के संकेत दे दिए थे। राहुल गांधी ने लुधियाना रैली में तमाम अटकलों को विराम दे दिया। लेकिन चन्नी का पलड़ा भारी कैसे पड़ा, आखिर सिद्धू कैसे पिछड़ गए? समझने की कोशिश करते हैं।
प्रदेश सरकार से बगावत
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष होते हुए भी सिद्धू ने अपनी ही पार्टी के सीएम चन्नी पर लगातार हमले करते रहे हैं। वह चन्नी के साथ कभी सहज नहीं रहे। सिद्धू महाधिवक्ता एपीएस देओल के साथ पिछले साल नवंबर में डीएस पटवालिया और दिसंबर में राज्य के डीजीपी आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय सहोता की नियुक्ति को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर हो गए थे। सिद्धू तो चन्नी को लेकर यहां तक कह चुके हैं वे कि राहुल गांणी के बनाए हुए सीएम हैं। प्रदेश रेत खनन को लेकर भी वे सरकार के खिलाफ बोल चुके हैं।
पंजाब में अपना विकास मॉडल पेश करना पड़ा भारी?
सिद्धू पंजाब के लिए अपना खुद का विकास मॉडल लोगों के सामने पेश कर रहे हैं। प्रताप बाजवा के नेतृत्व वाली घोषणापत्र समिति अभी भी मसौदे पर काम कर रही है। अमृतसर पूर्व के निवासी अक्सर उनकी अनुपलब्धता की शिकायत करते हैं। इससे पहले सिद्धू की पत्नी यहीं से विधायक थीं। ऐसे में कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलकमान सिद्धू के विकास मॉडल से कहीं न कहीं असहज था।
जाटसिख नेता न होने का हुआ नुकसान?
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सिद्धू को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित न करने से पार्टी को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होगा। क्योंकि सिद्धू पंजाब में जाटसिख नेता नहीं माने जाते। वहीं, चन्नी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाया जाता तो इसका सीधा असर दलित वोट पर पड़ेता। पंजाब में दलित वोट करीब तीस फीसदी है। चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस वर्ग में विश्वास जगा है। पंजाब में 20 फरवरी को विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के लिए वोट डाले जाने हैं।
