संगीत को हराम बताने वाले क्रूर पाकिस्तानी तानाशाह भी हो गए थे लता मंगेशकर के मुरीद
नई दिल्ली
पाकिस्तान के क्रूर तानाशाह जनरल मुहम्मद जिया-उल-हक भी लता मंगेशकर की सुनहरी आवाज से अछूते नहीं रह सके थे। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि वह भारत की कोकिला के प्रशंसक थे। दिलचस्प है कि उन्हें इस्लामी राष्ट्र में संगीत और महिलाओं की विशेषता वाली अन्य ललित कलाओं पर पाबंदी लगाने के लिए जाना जाता है।
एक पुराने इंटरव्यू के अनुसार, 1982 में दिवंगत भारतीय पत्रकार कुलदीप नैयर के साथ बात करते हुए जिया ने मंगेशकर के लिए अपनी प्रशंसा कबूल की थी। नैयर ने जिया को यह कहकर ताना मारा कि भारतीय कहते हैं कि जब भी वे किसी सांस्कृतिक दल को पड़ोसी देश में लाना चाहते हैं, तो पाकिस्तान में इसका स्वागत नहीं होता है। इस मंडली में कुछ महिला गायिकाएं शामिल थीं, जिनमें लता मंगेशकर भी थीं।
'मैं खुद लता मंगेशकर के गानों का शौकीन हूं, लेकिन…'
जिया ने उस समय तक पाकिस्तान के इस्लामीकरण का अपना प्रोजेक्ट शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा, "मैं जिम्मेदार व्यक्ति हूं। मैं खुद लता मंगेशकर के गानों का शौकीन हूं, लेकिन अगर आप उन्हें गाने के लिए पाकिस्तान भेजना चाहते हैं, तो मैं अभी नहीं कहूंगा क्योंकि यह मौजूदा पाकिस्तानी भावना के अनुकूल नहीं है।"
