एक दशक बाद भोज में डेढ़ दर्जन प्रोफेसरों के साथ होगी PHD

भोपाल
भोज मुक्त विश्वविद्यालय से एक दशक बाद विद्यार्थी पीएचडी में प्रवेश लेकर डिग्री ले पाएंगे। क्योंकि भोज विवि में डेढ़ दर्जन प्रोफेसरों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। उनके पास पीएचडी की सभी सीटें रिक्त बनी हुई हैं। उनकी सूनी सीटों पर प्रवेश कराने भोज आगामी सत्र में प्रवेश परीक्षा कराएगा। इसके लिए यूजीसी के गाइड लाइन के तहत कार्रवाई शुरू हो गई है।

भोज मुक्त विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों को अब नौकरी के अवसर मिलेंगे। क्योंकि भोज में करीब डेढ दर्जन नियमित प्रोफेसरों को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया है। एक दशक पहले यूजीसी ने भोज विवि की पीएचडी पर सवालिया निशान लगाकर बंद कर दिया था। क्योंकि भोज के गाइड दूसरे विवि परिधि में आते थे और भोज डिस्टेंश विवि होने के कारण नियमित प्रोफेसर की नियुक्तियां नहीं थीं। वर्तमान में सिर्फ प्रवीण जैन प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं, जो निलंबित हैं।

कुलपति समेत करीब 15 प्रोफेसर प्रतिनियुक्ति पर बने हुए हैं। प्रदेश के अन्य विवि में भोज आने तक उनके पास पीएचडी की सभी सीटें रिक्त बनी हुई हैं। इसलिए कुलपति जयंत सोनवलकर ने उनकी रिक्त सीटों पर यूजीसी के नियमों के तहत प्रवेश परीक्षा कराकर दाखिला देने का कार्यक्रम तैयार कर दिया है। रजिस्ट्रार डॉ. एलएस सोलंकी यूजीसी के नए नियमों की बारीकियों से परीक्षा कर रहे हैं, ताकि भोज से पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पडे।

रजिस्ट्रार सोलंकी का कहना है कि पीएचडी प्रोग्राम को शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव को प्रबंध बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद प्रवेश परीक्षा का इंतजाम कर सीटों का आवंटन कर शोध कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

इनका कहना
यूजीसी के नियमों के तहत विवि में मौजूद सभी फैकल्टी सदस्यों के साथ पीएचडी प्रोग्राम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. जयंत सोनवलकर, कुलपति, भोज मुक्त विवि

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