UP में योगी आदित्यनाथ तय, दूसरे राज्यों में चुनाव बाद भाजपा के CM पर हो सकता है संशय

 नई दिल्ली

अगले माह होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अपनी सत्ता वाले चार राज्यों में भाजपा मौजूदा मुख्यमंत्रियों के चेहरे पर दांव लगाने जा रही है। पार्टी की चुनाव प्रचार सामग्री में मुख्यमंत्री का चेहरा प्रमुखता से रखा जाएगा और चुनाव प्रचार में भी पार्टी के नेता उनके नेतृत्व में वोट मांगेंगे। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि फिर से सरकार बनने की स्थिति में है सभी मुख्यमंत्री बरकरार रखे जाएंगे। हालांकि स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में समीकरण बदल सकते हैं। जिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें चार राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा के अपने मुख्यमंत्री हैं।

पार्टी नेतृत्व ने चुनाव की घोषणा के बाद साफ कर दिया है कि चार राज्यों में वह अपने मौजूदा मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतर रही है और उनके चेहरे को ही आगे रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी, गोवा में प्रमोद सावंत और मणिपुर में बीरेन सिंह चुनाव अभियान व चुनाव प्रचार सागर सामग्री के केंद्र में रहेंगे। गौरतलब है कि पार्टी के हर चुनाव की अपनी रणनीति अलग होती है। इसके पहले पार्टी ने असम में अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोबाल पर दांव नहीं लगाया था। प्रचार अभियान में भी साफ कहा था कि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद किया जाएगा।
 
पार्टी ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ते हुए कमल निशान पर वोट मांगे थे। इससे साफ कर दिया था कि पार्टी चुनाव के बाद अपना चेहरा बदलेगी और बाद में हुआ भी यही, जब हेमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री बनाया गया। पहले मुख्यमंत्रियों को लेकर पशोपेश की स्थिति थी कि उन पर दांव लगाया जाए या सामूहिक नेतृत्व में चुनाव मैदान में जाए। लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए पार्टी ने अपने सभी चारों मुख्यमंत्रियों पर ही दांव लगाने का फैसला किया है। पार्टी के इस कदम से उसके चुनाव प्रचार अभियान में मजबूती आएगी और चुनाव के बाद की स्थितियों को लेकर भी कोई संदेह नहीं रहेगा।

दूसरे राज्यों में चुनाव बाद CM पर हो सकता है संशय
सरकार बनने की स्थिति में यही चेहरे उसके सरकार के मुखिया होंगे। हालांकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को लेकर पार्टी में कोई संदेह नहीं था, लेकिन बाकी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। हालांकि स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में कुछ बदलाव हो सकता है। गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में समीकरण को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं है।

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