BJP ने ललितपुर को छीना, BSP ने भी चखा जीत का स्वाद, सपा खोल पाएगी खाता?
लखनऊ
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले की दो विधानसभा सीटों महरौनी और ललितपुर में अब तक कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही जीत दर्ज करा पाए हैं। वहीं, इस जिले में जीत से दूर रही समाजवादी पार्टी (सपा) को इस बार विजय रथ यात्रा में बुंदेलखंड में उमड़ी भीड़ को देख कर ललितपुर में खाता खुलने की आस जगी है।
कांग्रेस के गढ़ में 1980 के बाद भाजपा की पैठ
बुंदेलखंड में झांसी मंडल के ललितपुर जिले में शुरूआती दौर की चुनावी सियासत बुंदेला परवार के ईद गिर्द घूमती रही। इस क्षेत्र में कांग्रेस ने सुजान सिंह बुंदेला की रहनुमाई में चुनावी जीत का परचम लहराया। कई दशकों तक ललितपुर में कांग्रेस की धाक बरकरार रहने के बाद 1980 के दशक में बसपा और भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई। वर्ष 1980 में ललितपुर विधान सभा से कांग्रेस के ओमप्रकाश रिछारिया और महरौनी सीट से सुजान सिंह बुंदेला विधायक बने। इसके बाद 1984 में ललितपुर सीट से कांग्रेस के राजेश खैरा जीते। जबकि महरौनी से भाजपा के देवेन्द्र कुमार सिंह ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का चुनावी रथ रोक दिया। इसके बाद 1989 में भाजपा ने ललितपुर की दोनों सीटों पर कब्जा जमा लिया। इस चुनाव में महरौनी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के देवेन्द्र कुमार सिंह, और ललितपुर से डा. अरवन्दि जैन विधायक बने।
कांग्रेस और बीजेपी के बीच लंबी लड़ाई
1991 में हुए उप चुनाव में ललितपुर से डॉ. अरवन्दि जैन तो जीत गए लेकिन महरौनी सीट पर कांग्रेस के पूरन सिंह बुन्देला जीते। इसके महज दो साल बाद एक बार फिर दोनों सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज कराते हुए 1993 के उप चुनाव में ललितपुर से डा. अरवन्दि जैन व महरौनी से देवेन्द्र कुमार सिंह को विधायक बनवाया। इसके बाद 1996 में ललितपुर में भाजपा से डॉ. अरवन्दि जैन लगातार चौथी जीत दर्ज की और महरौनी से कांग्रेस के पूरन सिंह बुन्देला जीत गये। तस्वीर को 2002 में पूरन सिंह बुन्देला ने पाला बदलकर महरौनी से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की जबकि ललितपुर से कांग्रेस के वीरेन्द्र सिंह बुन्देला ने जीत का परचम लहराकर जिले में पार्टी के बजाय अपने परिवार का दबदबा कायम कर दिया।
2007 में बसपा ने लगाई सेंध
बसपा ने 2007 में इस जिले में पहली बार जीत का स्वाद चखा। ललितपुर सीट पर बसपा से नाथूराम कुशवाहा व महरौनी से भाजपा के पं. रामकुमार तिवारी विधायक बने। हालांकि एक साल बाद ही कुशवाहा का निधन हो गया और 2010 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी सुमन कुशवाहा बसपा की विधायक बनीं। इसके बाद 2012 में बसपा ने सत्ताविरोधी लहर के बावजूद जिले की दोनों सीटों से भाजपा और कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया। ललितपुर से बसपा के रमेश प्रसाद कुशवाहा व महरौनी से फेरन लाल अहिरवार जीते। मगर, 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर में ललितपुर से भाजपा के रामरतन कुशवाहा और महरौनी से भाजपा के ही मनोहर लाल पंथ विजयी हुए।
