आर्थिक तंगहाली: नए साल में ’कागजी’ कर्मचारियों को टर्मिनेट करने की है तैयारी

भोपाल
नये साल में  तंगहाल नगर निगम ने कागजी (फर्जी) कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी  शुरू कर दी  है। फिलहाल नगर निगम के राडार पर 303 कर्मचारी हैं। इनमें से 176 श्रमिकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब 86 नियमित और 16 विनियमित कर्मचारियों की बर्खास्तगी की तैयारी है। नगर निगम में एक हजार से ज्यादा फर्जी श्रमिक कागजों में ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं 300 नियमित कर्मचारी बिना काम का वेतन ले रहे हैं।

दरअसल सालों से भर्ती नहीं होने से निगम में नियमित कर्मचारियों की संख्या कम हुई है। वहीं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2013 में निगम में 2200 श्रमिक थे। 2019 में इनकी संख्या 9000 हो गई है। ये श्रमिक उद्यान विभाग, फिल्टर प्लांट, अतिक्रमण विरोधी शाखा, वर्कशॉप, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, स्वास्थ्य शाखा में भर्ती किए गए हैं।

इनमें से एक तिहाई ड्यूटी पर नहीं आते। एक हजार श्रमिक ऐसे हैं, जो सिर्फ कागज पर ही हैं। वहीं दो हजार श्रमिक नगर निगम में भर्ती हुए हैं, लेकिन ड्यूटी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के घरों पर कर रहे हैं। ऐसे श्रमिकों की पहचान कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। शुरूआत स्वास्थ्य शाखा से की गई है।

प्रति श्रमिक की तनख्वाह औसत सात  हजार रुपए है। इस तरह करीब 9 हजार श्रमिकों की तनख्वाह पर सालाना 50 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इनमें से एक तिहाई श्रमिक हर माह निगम के खजाने में एक करोड़ 50 लाख रुपए की सेंध लगाते हैं, जो सालाना करीब 18 करोड़ की होती है।

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