55 छापे में कमजोर साक्ष्य के कारण क्लोजर, गृह विभाग ने दी जानकारी

भोपाल
मध्यप्रदेश में पिछले तेईस महीनों में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के जरिए अवैधानिक रूप से आय से ज्यादा सम्पत्ति अर्जित करने वाले सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाही की लेकिन इनमें से छह आरोपियों की मृत्यु हो जाने और 54 मामलों में कोर्ट में कमजोर साक्ष्य पेश किए जाने के कारण इनके खिलाफ मामलों में खात्मे की कार्यवाही करना पड़ा।

गृह विभाग की अधिकृत जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में जनवरी 2019 से लेकर नवंबर 2021 के बीच अधिकारियों-कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत डाले गए लोकायुक्त छापे की कार्यवाही के बाद कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगानी पड़ी है। इनमें से चार आरोपियों की तो मृत्यु हो गई जिसके कारण उनके मामलों में लोकायुक्त को क्लोजर रिपोर्ट लगानी पड़ी।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय छिंदवाड़ा में पदस्थ लेखापाल नामनरेश पाल की मृत्यु के काद 10 मई 2019 को न्यायालय में उनके मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई। इसी तरह छिंदवाड़ा जिले के हर्रई के पटवारी हल्का नंबर 9/11 के पटवारी केके विश्वकर्मा के मामले में और बैतूूल के जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में सहायक ग्रेड तीन रामकृष्ण राणे, उद्योग विभाग भोपाल के संयुक्त संचालक रमेश चंद्र कुरील,  संचालक राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान डॉ धर्मनारायण शर्मा तथा भोपाल में तहसील हुजूर के पटवारी रामविलास वर्मा की मौत होने के कारण इनके मामले में कोर्ट में खात्मे की रिपोर्ट लगाई गई है।

छापे डालने के बाद भी साक्ष्य के अभाव में 54 मामलों में दोषियों  के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों में लोकायुक्त पुलिस को क्लोजर रिपोर्ट लगानी पड़ी है। जिनके मामले में खात्मा रिपोर्ट लगा दी गई उनमें कटनी  के सरपंच उदयराज सिंह चौहान, परिवहन विभाग के उप निरीक्षक टीपीएस भदौरिया,  जनपद पंचायत रीठी के सीईओ उदयराज सिंह, कटनी चिकित्सालय के लिपिक राहुल मिश्रा, सिवनी उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक प्रदीप चौधरी, जबलपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ शिवेन्द्र सिंह और भू अर्जन अधिकारी जीएन सिंह, सहायक ग्रेड दो अशोक साहू, जनता गृह निर्माण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष , देवेन्द्र सिंह चौहान,  जबलपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ शिवेन्द्र सिंह के विरुद्ध दर्ज सात अन्य मामलों में भी क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई है।

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