सच्चे समाजवादी थे मामाजी, शराबबंदी करे सरकार

झाबुआ
आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाने के लिए जीवनभर निस्वार्थ भाव से काम करने वाले मामा बालेश्वर दयाल की 23 वी पुण्यतिथि आज झाबुआ जिले के बामनिया गांव में समारोहपूर्वक मनाई गई।

इस अवसर पर पर वरिष्ठ पत्रकार क्रांति कुमार वैद्य द्वारा संकलित 9 वीं किताब का लोकार्पण गांव बामनिया में मामा जी की समाधी स्थल पर  किया गया।
लोकार्पण कार्यक्रम में मामा जी की मानस पुत्री मालती बहन, सुशीला बहन, दिल्ली से आए सी एस डी एस के संजय कुमार , कुशलगढ़ में मामा बालेश्वर दयाल शासकीय महाविद्यालय की प्रोफेसर निधि जैन, उदयपुर से आए समता संदेश के संपादक हिंम्मत सेठ, प्रतापगढ़ में मास्टर रामलाल निनामा, पत्रकार सत्यनारायण शर्मा एवं राजस्थान से आए मामा जी के भक्तों द्वारा किया गया।

 उक्त जानकारी देते हुए किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव और समाजवादी विचारक राजेश बैरागी ने अपनी खबर को बताया कि मामा जी की स्मृति में होने वाले पुण्य स्मरण समारोह  अध्यक्षता मालती बहन ने की। अपने संबोधन में बहनजी ने कहा कि मामा जी इसीलिए पूजे जाते हैं क्योंकि उन्होंने समाजवादी विचारों का केवल प्रचार प्रसार ही नहीं किया बल्कि उन्होंने जीवन भर आचरण में भी उतारा। मामाजी ने  संत का जीवन जिया। उन्होंने कहा कि मैं 96 वर्ष की हो चुकी हूं। हो सकता है कि मेरी आगे किसी कार्यक्रम में भागीदारी ना हो लेकिन मैं चाहती हूं कि मामाजी  समाधि पर होने वाला कार्यक्रम हर वर्ष इसी प्रकार व्यवस्थित तरीके से चलता रहे। इस अवसर पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार क्रांति कुमार वैद्य ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य के माध्यम से मामा जी के विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत है।

 समाजवादी विचारक श्री  वैद्य ने कहा कि मैंने पूर्व विधायक डॉ सुनीलम एवं समाजसेवी राजेश बैरागी के सहयोग से अब तक 9 किताबें मामाजी पर तैयार की है। मेरा सपना है कि मामा जी के विचार को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी आगे आए।
हमारा प्रयास है कि पूज्यनीय  मामा जी के निर्वाण दिवस पर बामनिया गांव में  आने वाले हर व्यक्ति को मामा जी की जीवनी  उपलब्ध कराई जाए। इसे मामाजी के प्रति श्रद्धा रखने वाले  हर भगत को पढ़ना चाहिए। पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने इस  कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि मामा जी के प्रति सरकारों ने भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया है।

मामा जी ने भीलांचल एवं देश को बेगारी प्रथा तथा जागीरदारी प्रथा से मुक्ति दिलाई थी। आज तक सरकार ने  ना तो उनके नाम से बामनिया रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया, ना ही बामनिया में शासन की ओर से  मामाजी का कोई स्मारक बनाया गया है। शासन की उदासीनता इतनी है कि झाबुआ में  जिलाधीश कार्यालय के सामने मूर्ति स्थापित करने के लिए भूमि आवंटित भी अब तक  नहीं हो पाई  है। पूर्व विधायक सुनीलम ने  कहा कि मामाजी शराबबंदी चाहते थे जिसका आज भी मामा जी के अनुयायी पालन करते हैं ।

उन्होंने इस बात पर दुख प्रकट किया कि राज्य सरकार घर-घर शराब पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। समाजवादी विचारक सुनीलम ने नशा मुक्त भारत आंदोलन से मामाजी के अनुयायियों तथा आदिवासियों से जुड़ने अपील की।

  इस मौके पर मास्टर राम लाल निनामा ने कहा कि मेरा परिवार 5 पीढ़ियों से मामाजी का अनुयायी है। उन्होंने बताया कि भीलांचल में 500 भजन मंडलियां मामा जी के विचारों का प्रचार-प्रसार भजनों के माध्यम से कर रही है। उन्होंने बताया कि मामाजी के भगत हर वर्ष 21 दिसंबर को मामा जी की धूनी मामादेव कठेड़, छोटी सादड़ी, जगलावद, प्रतापगढ़ से पदयात्रा शुरू कर, 22 दिसंबर पीपलखूंट, 23 दिसंबर को आमली खेड़ा काकण सेजा , 24 दिसंबर को घाटा गढ़ली,  कलीपारी, 25 दिसंबर को बड़ी सरवा से चलकर 26 दिसंबर को झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के गांव बामनिया में मामा जी की समाधी पर  पहुंचते है। बामनिया में मामाजी जहां रहे उस स्थान को भील आश्रम के नाम से जाना जाता है।

मामा जी के अनुयायी समाजवादी विचारक और किसानों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले साथी राजेश बैरागी ने कहा कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले मामा जी के अनुयायियों ने तो पूरी निष्ठा के साथ कार्य किया है। अब जरूरत मामा जी के विचारों को लेकर ताकतवर राजनीतिक संगठन की है। समारोह की आयोजन समिति के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार सत्यनारायण शर्मा के साथ विभिन्न राज्यों के गांव , शहरों से एकत्र हुए समाजवादी साथियों  ने मामाजी का पुण्य स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर लगातार बढ़ते रहने का संकल्प लिया।

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