समाज भावी पीढ़ी को आजादी की धरोहर के संरक्षण के संस्कार दें

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मातृभूमि की सेवा का संकल्प ही नागरिक का मूल कर्त्तव्य हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए सभी क्षेत्रों, वर्गों की प्रगति में सहयोग की जिम्मेदारी नागरिक का प्रथम कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि समाज के समर्थ और सक्षम सदस्य दरिद्रता, अज्ञानता और अंधविश्वास को समाप्त करने की जिम्मेदारी आगे बढ़कर स्वीकार करें।

राज्यपाल पटेल विद्या भारती विद्वत परिषद मध्य भारत और साहित्य अकादमी के तत्वावधान में आयोजित स्वाधीनता के अमृत महोत्सव कार्यक्रम में आयोजित सारस्वत व्याख्यान माला को संबोधित कर रहे थे। कुलपति साँची विश्वविद्यालय श्रीमती नीरजा अरूण गुप्ता और विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के अध्यक्ष बनवारी लाल सक्सेना भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुलामी की बेड़ियों से आजादी की अनमोल सौगात असंख्य वीर-वीरांगनाओं के बलिदान से मिली है, जिनके नाम इतिहास लेखन में छूट गए है। समाज उनका स्मरण कर, भावी पीढ़ी को आजादी की अमूल्य धरोहर के संरक्षण के लिए समर्पित, संगठित और संस्कारित करने का कार्य करे। उन्होंने कहा कि आजादी का 75वां अमृत महोत्सव अपनी गौरवशाली संस्कृति को पहचाने और भविष्य की कार्य-योजना पर कार्य करने का अवसर है। उन्होंने बौद्धिक चिंतन के आयोजन के लिए विद्या भारती की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों से बौद्धिक विमर्शों के आयोजन कराकर मातृभूमि के लिए जीवन का बलिदान करने वालों से युवाओं को परिचित कराएँ। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया रोग नियंत्रण के लिए जरूरी प्रयासों की जानकारी दी और रोग की रोकथाम और चिन्हांकन प्रयासों में शिक्षण और समाज सेवी संस्थाओं से आगे आकर सहयोग का अनुरोध किया।

मुख्य वक्ता सांसद डॉ. राकेश सिन्‍हा ने आजादी की लड़ाई के गुमनाम शहीदों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आजादी के संघर्ष की परम्पराओं को पुनर्जागृत करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के मूल तत्व को पुन: स्थापित करने और इतिहास के तथ्यों को सामने रखकर आंदोलन की मूल प्रकृति को समझने की पहल का अवसर आजादी का अमृत महोत्सव है। उन्होंने कहा कि गतिशील समाज अतीत के पन्नों को पलटकर भावी भविष्य को लिखता है। भारतीय राष्ट्रवाद का आधार भौगोलिक नहीं सांस्कृतिक है। इसे समझने के प्रयास जरूरी हैं।

प्रारम्भ में विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के संयोजक अजय शिवहरे ने व्याख्यान माला की प्रस्तावना प्रस्तुत की। आभार प्रदर्शन साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक विकास दवे ने किया। श्रीमती खुशबू पांडे ने दीप प्रज्जवलन, सरस्वती वंदना और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। संचालन कुलसचिव साँची विश्वविद्यालय अलकेश चतुर्वेदी ने किया।

 

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