आखिर क्यों वैक्सीन की बूस्टर डोज के खिलाफ है WHO, तीसरी खुराक की आलोचना

जिनेवा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोनो वायरस (कोविड -19) के खिलाफ दी जाने वाली वैक्सीन की बूस्टर डोज को व्यापक तरीके से दिए जाने की आलोचना की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि किसी भी वैरिएंट को देखकर इस तरह की नीति को अपनाने से पहले सोचना चाहिए कि अभी भी बहुत से ऐसे देश हैं, जहां वैक्सीनेशन काम अभाव में नहीं हो रहा है। बूस्टर डोज यानी तीसरी खुराक के उपयोग से वैक्सीन असमानता और महामारी दोनों बढ़ने लगेगी। गरीब राष्ट्र के लोगों के लिए वैक्सीन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

बूस्टर डोज पर क्या बोले WHO के महानिदेशक बूस्टर डोज पर क्या बोले WHO के महानिदेशक बूस्टर डोज के लगातार बढ़े रहे उपयोग पर बोलते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बुधवार (22 दिसंबर) को कहा कि कोई भी देश बूस्टर खुराक के जरिये वैश्विक महामारी से बाहर नहीं आ सकता है। उन्होंने कहा, तीसरी खुराक के लिए फिर से वही देश अधिक वैक्सीन खरीदेंगे, जहां पहले से ही उच्च स्तर का टीकाकरण कवरेज है। जो कि गरीब देशों के लिए अच्छा नहीं है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने कहा कि बूस्टर डोज कोरोना वायरस को "फैलने और उत्परिवर्तित करने का अधिक अवसर" देगा, इस प्रकार संभावित रूप से महामारी का विस्तार करेगा।

बूस्टर डोज पॉलिसी का विचार अच्छा क्यों नहीं है? बूस्टर डोज पॉलिसी का विचार अच्छा क्यों नहीं है? डब्ल्यूएचओ ने वैक्सीनेशन पर रणनीतिक सलाहकार समूह (एसएजीई) और उसके कोविड-19 टास्क फोर्स के सलाह से यह रिपोर्ट निकाला है कि अस्पताल में भर्ती होने और कोरोनो वायरस बीमारी से होने वाली मौतों का अधिकांश हिस्सा वर्तमान में अशिक्षित लोगों में है। ना की उन लोगों में जो पहले वैक्सीन ले चुके हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वैक्सीन की दोनों डोज लेना अधिक जरूरी है ना कि बूस्टर डोज। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, "कोई भी देश महामारी से बूस्टर डोज के इस्तेमाल से बाहर नहीं निकल सकता है।''

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