सर्वे में खुलासा: सरकारी स्कूलों के 42 फीसदी बच्चों पर अभिभावक ध्यान नहीं देते

रांची

झारखंड के करीब 40 फीसदी बच्चों पर अभिभावक ध्यान नहीं देते। सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले मात्र 60.3 फीसदी बच्चों पर ही अभिभावक घर पर ध्यान दे पाते हैं। इसका खुलासा एनुवल स्टेट्स ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) में हुआ है। राज्य के सरकारी स्कूल के बच्चों को निजी स्कूलों के बच्चों की तुलना में घर में पढ़ाई में कम सहयोग मिल रहा है।

सरकारी स्कूल के 42.5 फीसदी बच्चों पर अभिभावक ध्यान नहीं देते हैं। 57.5 फीसदी बच्चों पर ही अभिभावक ध्यान दे रहे हैं। वहीं निजी स्कूलों के 72.5 फीसदी बच्चों पर अभिभावक घर पर पढ़ाई में ध्यान देते हैं और 27.5 फीसदी बच्चों पर ध्यान नहीं देते। बच्चों को घर पर पढ़ाई में सहयोग में सबसे ज्यादा गिरावट नौंवी या उससे ऊपर के क्लास में हुई है। घर पर पढ़ने में सहयोग मिलने वाले नामांकित बच्चों का अनुपात 2020 में तीन चौथाई से घटकर इस साल दो तिहाई हो गया है।

कोरोना संक्रमण के बाद भी छात्र-छात्राओं के बीच पाठ्यपुस्तक पहुंचाई गई है। झारखंड के सरकारी स्कूलों में नामांकित 89.8 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को 2021 में किताबें उपलब्ध कराई गई, जबकि 2020 में 77.1 प्रतिशत बच्चों के बीच ही किताबें उपलब्ध 2020 में सरकारी स्कूलों के 78.9 फीसदी बच्चों तक पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराई गई थी, वहीं 2021 में 90.9 फीसदी बच्चों तक किताबें पहुंचाई गई है। निजी स्कूलों की बात करें तो 2020 में 71.6 फीसदी बच्चे किताब ले सके थे, जबकि इस साल 85.2 फीसदी बच्चे किताब खरीद सके हैं। बच्चों तक किताबें उपलब्ध कराने के मामले में झारखंड सिर्फ बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, और उत्तराखंड से ही ऊपर है, बाकि सभी जिलों में 89.8 फीसदी से ज्यादा बच्चों को पाठ्य पुस्तक मिली हैं। झारखंड में पाठ्यपुस्तक के अलावे अतिरिक्त शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। वाट्सएप ग्रुप, डिजी स्कूल एप समेत अन्य माध्यमों से बच्चों को कंटेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
 
पढ़े लिखे अभिभावकों के बच्चों के पास ज्यादा स्मार्ट फोन है। वैसे घर जहां माता-पिता के शिक्षा का स्तर ऊपर है वहां स्मार्टफोन की उपलब्धता है। नौंवी से अधिक पढ़ाई करने वाले अभिभावकों के 80 फीसदी बच्चों के पास स्मार्ट मोबाइल है, जबकि पांचवीं तक की पढ़ाई करने वाले अभिभावकों के 50 फीसदी बच्चों तक मोबाईल है। वहीं, जो अभिभावक बहुत कम पढ़े लिखे हैं उनमें भी लगभग एक चौथाई से अधिक बच्चों की पढ़ाई के लिए मार्च 2020 के बाद नया स्मार्टफोन खरीदा गया है। राज्य के 39.7 फीसदी बच्चे स्मार्ट फोन का उपयोग अभी भी नहीं कर पा रहे हैं। घर की आर्थिक स्थिति और इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने से भी कई जगहों पर स्मार्ट फोन की कमी है।

देशभर में ट्यूशन में बढ़ोतरी

देश भर में केरल को छोड़कर ट्यूशन पढ़ने के मामले में बढ़ोतरी हुई है। झारखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। सरकारी के साथ-साथ निजी स्कूलों के सभी क्लास के बच्चों के ट्यूशन लेने में बढ़ोतरी हुई है। कम पढ़े लिखे अभिभावकों के बच्चों में ट्यूशन लेने के अनुपात में 12.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, नौंवी से ज्यादा पढ़े लिखे अभिभावकों के 7.2 फीसदी बच्चे ही ट्यूशन ले पा रहे हैं।

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