42 साल बाद भाटापारा कॉलेज के सहपाठियों का मिलन समारोह
भाटापारा
कॉलेज के दिनों की वासंती छटा जहां फिर लौट कर मानो थम सी गई, जब वही चेहरे चार दशक बाद अपनी यादों को समेटे हुए फिर से मिले। बीसवीं सदी के गजानन महाविद्यालय में 1975 से 1979 तक साथ साथ पढ़े साथी 21 वीं सदी में फिर से मिले। 42 बरस बाद बिछड़े साथियों के मिलन समारोह में उनके यादों की मुस्कान ने चेहरे की शिकन ही मिटा कर रख दी थी। कॉलेज के 3 साल का संग साथ के लंबे अंतराल में अपने जीवन साथियों के साथ मिलने का अवसर ही निराला सा लगा।इन्हीं के बीच कॉलेज के वयोवृद्ध प्रोफेसर रामा प्रसाद मिश्रा की उपस्थिति ने सभी को अभिभूत कर दिया।
स्कूल से कॉलेज के दिनों के साथी और उन दिनों के गुरुजनों में बलदेव भारती, बी.आर शर्मा, इंदु मिश्रा,एस. रंगा डेनियल मैडम भी शामिल हुई। कालेज चौराहे पर स्थित बब्बू पैराडाइज में गुरुजनों का स्वागत तिलक लगाकर किया लता त्रिवेदी, मंजू लता दास, वीरेंद्र शर्मा और अनीता तिवारी ने। अपने शिष्यों के बीच वयोवृद्ध प्रोफेसर रामा प्रसाद मिश्रा ने कहा कि सृष्टि रचना के मूल में ही मित्रता का रहस्य छुपा हुआ है। भगवान विष्णु ने निर्विकार भाव रखते हुए विचार कर रहे थे कि वे अकेले क्या करें। ऐसा विचार करते हुए उन्होंने अपने नाभि से कमल उत्पन्न किया जिस पर ब्रह्मा जी आसीन थे। सृष्टि का सिलसिला शुरू हुआ और द्वापर में कृष्ण अवतार हुआ। कृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव ने राजा और रंक के बीच की दूरियां ही मिटा दी थी ऐसी ही मैत्री भावना के आयोजन में आकर मैं सुखद अनुभव कर रहा हूं जिस उद्देश्य को लेकर सृष्टि का निर्माण हुआ।
अनीता तिवारी और मुरारी साहू ने गुरुजनों का स्वागत करते हुए सभी साथियों का परिचय दिया इसी के साथ बलदेव भारती ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह एक नई परंपरा की शुरूआत है जो प्रेरणादाई और अनुकरणीय है। बी.आर. शर्मा ने सभी को आशीष देते हुए कहा कि यह शिक्षा का ही संस्कार है जो एक सार्थक समाज का निर्माण करती है और ऐसा आयोजन सभी का ध्यान आकृष्ट करता है, यह एक सराहनीय आयोजन है। इंदु मिश्रा अपने पढ़ाये हुए छात्रों के बीच अपने आपको पाकर बड़ी अभिभूत हुई जिन्होंने कहा कि जीवन दोस्तों के बिना अधूरा है जिन्होंने बताया कि बी.आर. शर्मा और मैं खुद सहपाठी रह चुके हैं। डेनियल मैडम ने अपने पुराने अंदाज में अपनी शायरी से मित्रता का ऐसा रंग जमाया कि माहौल खुशनुमा हो गया। बचपन के मित्र जिनमें अधिकांश सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्हीं में कुछ व्यवसाय से भी जुड़े हुए हैं उन सभी का परिचय एक दूसरे से हुआ।
