सीता की रक्षा करते हुए जटायु ने त्यागे प्राण, श्रीराम ने पिता की तरह किया अंतिम संस्कार
टीकमगढ़
आध्यात्मिक नगरी ओरछा में पहली बार चल रही अंतर्राष्ट्रीय रामलीला में श्रीराम सुग्रीव मित्रता और लंका दलन की लीला का मंचन किया गया। इसके पहले देर रात शूर्पणखा अंग भंग खर दूषण वध सीता हरण जटायु उद्धार और शबरी मिलन की लीला का मंचन किया गया।
लीला में दिखाया गया कि जब पापी रावण छल से सीता का हरण कर लेता है तो रास्ते में वृद्ध जटायु रावण से युद्ध करते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। सीता की खोज करते हुए जब श्रीराम जटायु से मिलते हैं। घायल जटायु श्रीराम के दर्शन कर माता सीता के हरण की बात सुनाते हैं और अपने प्राण त्याग देते हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम पिता की तरह जटायु का अंतिम संस्कार करते हैं।
मुख्य अतिथि के तौर पर सिंहपुरा हनुमान मन्दिर के महंत श्री बालकदास महाराज सर्वेश कुमार दीक्षित सीनियर पीएससी आॅफिसर उप्र झांसी डीआईजी जोगेंद्र कुमार मौजूद रहे स अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया । इस अवसर पर ओरछा के राजा राम की लीला समिति के चेयरमेन सत्यभूषण जैनए अध्यक्ष डॉण् वीपी टंडनए डॉण् वंदना टंडनए पियूष जैन सहित अमित राय जिजौरा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
लीला में दिखाया गया कि श्रीराम-लक्ष्मण के रूप पर राक्षसी शूर्पणखा मोहित हो जाती है। उसने श्रीराम के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। लेकिन प्रभु ने उसे ठुकरा दिया। इसके बाद शूर्पणखा ने लक्ष्मण से विवाह की बात कही, लेकिन लक्ष्मण ने भी उसकी बात नहीं मानी। आखिरकार शूर्पणखा ने अपना असली रूप दिखाया और लक्ष्मण ने उसके नाक.कान काटकर अंग.भंग कर दिया। नाराज शूर्पणखा अपने भाई खर दूषण के पास पहुंचती हैं। बहिन की दशा देखकर खर दूषण श्रीराम लक्ष्मण से युद्ध करने पणर्कुटी पहुंचते हैं। जहां भीषण युद्ध के बाद भगवान श्रीराम खर और दूषण का वध कर देते हैं। इसके बाद लीला में सीता हरण के प्रसंग का मार्मिक ढंग से मंचन दिखाया गया।
सीता की खोज में श्रीराम और लक्ष्मण माता सबरी से मिलते हैं। भगवान श्रीराम माता शबरी को नभदा भक्ति का उपदेश देते हैं। माता शबरी प्रभु श्रीराम से ऋषिमुक पर्वत पर निवास कर रहे सुग्रीव से मित्रता की बात कहती हैं। इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण ऋषिमुक पर्वत पहुंचकर सुग्रीव से मित्रता करते हैं। अतर्राष्ट्रीय लीला में 100 से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। देश.विदेश में रामलीला के माध्यम से अपनी कला दिखा चुके सभी पात्रों के अभिनय को ओरछा के दशर्कों की खूब सराहना मिल रही है।
