महंगाई पर लगाम लागने पर रहेगा जोर , लगातार 8वीं बार ब्याज दरों में कमी की उम्मीद नहीं

नई दिल्ली 
रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में मौद्रिक नीति समति (एमपीसी) नीतिगत दरों पर फैसला आज करेगी। अर्थव्यवस्था के कोरोना संकट से धीरे-धीरे उबरने के संकेत के बीच आरबीआई के लिए इस बार एक नई चुनौती सामने होगी। दास के पास एक तरफ बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा पैसे की उपलब्धता को नियंत्रित करने की चुनौती है। वहीं दूसरी ओर महंगाई को काबू करना पहले से बड़ी मुसीबत बना हुआ है। ब्लूमबर्ग की 30 बैंकिंग एक्सपर्ट की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक लगातार आठवीं बार ब्याज दरों में कमी का कोई संकेत नहीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संकट के मद्देनजर रोजगार सृजन, रुपये की कमजोरी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए रिजर्व बैंक कुछ कड़े कदम उठा सकता है। हालांकि, उसके लिए यह उतना आसान नहीं है जितना दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दरें घटाने पर या अतिरिक्त नकदी को आसान कर्ज के रूप में बाजार में डालने पर महंगाई के और बढ़ने का खतरा है। जबकि किसी भी हाल में महंगाई पर अंकुश रिजर्व बैंक की पहली प्राथमिकता है।

दूसरी ओर यदि अतिरिक्त नकदी का जल्द हल नहीं निकाला गया तो वह पूरे बैंकिंग क्षेत्र के लिए नई मुसीबत बन सकती है जो पहले से ही ऊंचे एनपीए से जूझ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञ इसी आधार पर शुक्रवार को रिजर्व बैंक की ओर से कुछ साहसिक फैसले की उम्मीद कर रहे हैं।
रिजर्व बैंक महंगाई बढ़ने के डर से ब्याज दरों में कटौती से पहले भी इनकार कर चुका है। साथ ही महंगाई पर अंकुश के लिए वह चौतरफा कोशिश करने का सुझाव दे चुका है। रिजर्व बैंक को महंगाई दर को चार फीसदी पर दो फीसदी घट-बढ़ के साथ दायरे में रखने का लक्ष्य दिया गया है। जबकि खुदरा महंगाई कई माह से पांच फीसदी से ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं उसमें रिजर्व बैंक के लिए महंगाई पर अंकुश रखना आसान नहीं होगा।

कर्ज लेने की बजाय जमा करने की होड़

कोरोना संकट में लोगों की आय घटी है। इसके बावजूद वह कर्ज लेने की बजाय बैंकों में जमा करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़े इसकी गवाही दे रे हैं। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों का ऋण 24 सितंबर को समाप्त पखवाड़े में 6.67 प्रतिशत बढ़कर 109.57 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस दौरान बैंकों की जमा 9.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 155.95 लाख करोड़ रुपये रही।

यानी जमा की रफ्तार कर्ज से डेढ़ गुना अधिक है। एक साल पहले 25 सितंबर, 2020 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों का ऋण 102.72 लाख करोड़ रुपये और जमा 142.62 लाख करोड़ रुपये थी। इससे पिछले 10 सितंबर, 2021 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों का ऋण 6.7 प्रतिशत और जमा 9.32 प्रतिशत बढ़ी थी। वित्त वर्ष 2020-21 में बैंकों का ऋण 5.56 प्रतिशत और जमा 11.4 प्रतिशत बढ़ी थी।

रोजगार बढ़ाने के लिए सख्त कदम की उम्मीद
कोरोना संकट से उबरने का संकेत दे रही अर्थव्यवस्था में रोजगार वृद्धि की रफ्तार बेहद धीमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक के पास रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की चुनौती है। यह तभी संभव है जब कारोबारियों और उद्योग को आसान और बेहद सस्ती दरों पर कर्ज मिले। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक बैंकिंग क्षेत्र की नकदी का बेहतर हल निकालने के लिए सख्त और चौंकाने वाले फैसले भी कर सकता है। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास कई बार यह कह चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक लीक से हटकर फैसले लेने में भी नहीं हिचकेगा।

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