डेंगू और वायरल बुखार के बढ़ रहे मामले, जाने लक्षण और बीमारी से कैसे बचे

यूपी के फिरोजाबाद से लेकर हरियाणा के पलवल तक डेंगू के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि डी-2 स्ट्रेन की वजह से डेंगू का कहर बढ़ रहा है। हालांकि आपको बहुत परेशान नहीं होना चाहिए। सही समय पर टेस्टिंग और इलाज से इस बीमारी को मात देना मुश्किल नहीं है। आइए डेंगू के लक्षणों, टेस्ट और इलाज से जुड़ी कुछ जरूरी बातें जानते हैं।

डेंगू और डी2 स्ट्रेन क्या है
डेंगू एक तरह का वायरल बुखार है। यह वायरस जनित बीमारी है, जो एडीज इजिप्टी मच्छर (मादा) के काटने से फैलती है। डेंगू का मच्छर ज्यादातर दिन में ही काटता है। डेंगू बुखार चार तरह का होता है। इनमें से डी-2 स्ट्रेन को काफी खतरनाक माना जाता है। इस स्ट्रेन की चपेट में आकर कोई भी शख्स बहुत तेजी से बीमार होता है। कई बार यह जानलेवा भी होता है। डॉक्टर इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम के तौर पर भी देखते हैं। इसमें बुखार से पीड़ित मरीज का अचानक ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

कैसे फैलता है डेंगू
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर जमा पानी में तेजी से पनपते हैं। कूलर का पानी वक्त-वक्त पर बदलते रहना चाहिए। बारिश के बाद का मौसम इन मच्छरों के प्रसार की प्रमुख वजह होता है। एडीज मच्छर खुले और साफ पानी में अंडे देते हैं। 16 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान में ये अंडे देते हैं। इसके साथ ही डेंगू के मच्छर लिफ्ट और दूसरे साधनों से किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं और वहां अंडे देकर बीमारी को फैला सकते हैं।

क्या लक्षण उभरते हैं
डेंगू में आम फ्लू जैसे लक्षण उभरते हैं। ये लक्षण 2 से 7 दिन तक रह सकते हैं। डेंगू मच्छर के काटने पर 4 से 10 दिन में बीमारी पूरी तरह फैल जाती है। शुरुआत में सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मिचली आना, उल्टी, हड्डियों या मांसपेशी में दर्द, चकत्ते जैसे लक्षण होते हैं। अगर सही से इलाज न मिला तो यही सामान्य डेंगू गंभीर बन जाता है। इसमें पेटदर्द, खून की उल्टी, तेज सांस चलना, मसूड़ों से खून जैसी दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा डीएचएफ (डेंगू रक्तस्रावी बुखार) में मरीज के शरीर पर लाल चकत्ते, नाक, मसूड़ों और पेशाब में खून आनाऔर हल्की खुजली हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टरी सलाह लेकर अस्पताल ले जाने में देर नहीं करनी चाहिए।

क्या टेस्ट कराएं
डेंगू के लक्षण वायरल फीवर और मलेरिया से मिलते-जुलते होते हैं। इस वजह से कई बार लक्षणों की सही से पहचान नहीं हो पाती है। डेंगू का पता लगाने के लिए सबसे विश्वसनीय जांच एलाइजा टेस्ट है। इसका रिजल्ट 100 फीसदी सही आता है। वहीं एलाइजा में भी दो तरह के टेस्ट होते हैं- आईजीएम और आईजीजी। डेंगू के लक्षण पता चलने के 3 से 5 दिन के अंदर आईजीएम टेस्ट करवा लेना चाहिए। वहीं आईजीजी टेस्ट की मियाद 5 से 10 दिन की है। वहीं डेंगू के ज्यादातर मामलों में डॉक्टर पहले एंटीजन ब्लड टेस्ट (NS1) की सलाह देते हैं। लक्षण सामने आने पर पांच दिन के अंदर ही NS1 टेस्ट कराया जाता है। शुरुआती दिनों में इसके अच्छे नतीजे होते हैं। लेकिन डेंगू के लक्षण बढ़ने पर यह टेस्ट कारगर नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक लक्षण दिखने के पांच दिन के अंदर यह टेस्ट करा लेना चाहिए।

कैसे होता है इलाज
डेंगू से बचाव की कोई वैक्सीन या दवा नहीं है। इसमें भी कोविड की तरह लक्षणों का इलाज होता है। ऐसे में किसी डॉक्टर से सलाह लेकर ही ट्रीटमेंट करना चाहिए। इसमें मरीज को पर्याप्त आराम की जरूरत होती है। इसके अलावा तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में लेने चाहिए। दिनभर में कम से कम 12 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इसके साथ ही छाछ, नारियल पानी और नींबू पानी भी समय-समय पर लेते रहना चाहिए।

प्लेटलेट्स कितना अहम
तकरीबन हर बुखार में खून के अंदर प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में ढाई से तीन लाख प्लेटलेट्स होती हैं। वहीं डेंगू में यह संख्या काफी तेजी से गिरती है। अगर यह संख्या 10 हजार से कम हो जाती है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि प्लेटलेट्स का कम होना उतनी चिंता की बात नहीं है। इलाज के दौरान यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि मरीज के शरीर का तापमान बढ़ने ना पाए।

जिसे डेंगू हो चुका क्या वह सेफ है?
डेंगू के चार स्ट्रेन हैं। ऐसे में अगर एक स्ट्रेन से आप संक्रमित हुए हैं तो यह गफलत ना रखें कि दूसरा स्ट्रेन संक्रमित नहीं कर सकता है। अमूमन डेंगू का दूसरा अटैक ज्यादा खतरनाक माना जाता है। ऐसे में मच्छरों को पनपने से रोकना और अपना बचाव करना जरूरी है।

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