ई-नीलामी ने प्रदेश सरकार का राजस्व बढ़ाया, अनुदान व्यवस्था पर सवाल

भोपाल
कोरोना काल में लोगों की आजीविका का सहारा बने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग अब राज्य सरकार की नीलामी पॉलिसी में उलझ गए हैं।

इस पॉलिसी के आधार पर सरकार ने ई नीलामी के जरिये जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद आवंटित की जाने वाली जमीन से सरकार का राजस्व तो बढ़ रहा रहा है पर जिस उद्यमी के लिए पालिसी बनाई गई है, उसकी परेशानी भी बढ़ गई है। प्लाट्स की महंगी कीमतों ने छोटे और साधारण जमा पूंजी से उद्यम लगाने वाले उद्यमियों की कमर तोड़ना शुरू कर दिया है। इसका विरोध भी हो रहा है पर सरकार इस बारे में सुनने को तैयार नहीं है।  छतरपुर जिले में पिछले दिनों हुई ई नीलामी में जिस प्लाट की कीमत 3 लाख रुपए रखी गई थी वह 43 लाख से अधिक की ई नीलामी में बिका।

इसी तरह की स्थिति अन्य कीमत के प्लाट्स में रही। यही स्थिति प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप, पीथमपुर और अन्य स्थानों पर भी है। विभाग के ही अफसर कहते हैं कि इससे महंगी जमीन बिकने पर सरकार का राजस्व तो बढ़ रहा है पर उद्यमी के लिए यह घाटे का सौदा बन गया है क्योंकि मोटी रकम देने के बाद भी जमीन मिलने का पूरा मौका नहीं होता। अगर उद्यमी के पास इतना पैसा होता वह सीधे जमीन खरीदकर उद्यम लगा लेता। एमएसएमई विभाग की प्रक्रिया में नहीं उलझता।

उद्योग संघ पदाधिकारियों का कहना है कि जब लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर जमीन खरीदने और उद्यम लगाने वाले को एक साथ अनुदान देने से उसकी वर्किंग कैपिटल के काम में वह राशि आ जाती थी। अब ऐसा नहीं हो पाता और उद्यम शुरू होने के बाद टूटने की स्थिति में आ जाते हैं। जो एमएसएमई बंद होने की कगार पर हैं, उन्हें फिर शुरू करने को लेकर भी एमएसएमई पॉलिसी में कोई बात नहीं कही गई है।

मध्य प्रदेश लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष विपिन जैन कहते हैं कि उद्यमंी के लिए तीन बातें जरूरी होती हैं। पहली यह कि निवेश में कितनी आसानी होगी, निवेश के बाद उद्यम संचालन में कितनी आसानी होगी और अगर किसी कारण से निवेश करने वाले उद्यम को उद्योग से बाहर जाना है तो उसमें कितनी आसानी होगी? जो नई पालिसी लागू की गई है, उसमें इन तीनों ही बातों को नजर अंदाज किया गया है। एमएसएमई क्षेत्र में जमीन की कीमतें ज्यादा रखी गई हैं। जब डेढ़ से दो करोड़ में उद्यमी जमीन लेगा और उस पर आधिपत्य भी नहीं पा सकेगा तो वह अपना काम कैसे चलाएगा। सरकार को उद्यम को बढ़ावा देने के लिए इन बातों पर गंभीरता से मंथन करना चाहिए।

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