किसानों को जैविक खाद के लिए सतत रूप से करें प्रेरित : जिपं सीईओ

जांजगीर-चांपा
जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता एवं कृषि लागत को कम करने के उद्देश्य से किसानों को गोठानों में तैयार वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट का वितरण सतत रूप से किया जा रहा है। इसको और अधिक बढ़ाने के लिए किसानों को जैविक खाद से होने वाले फायदों के बारे में लगातार अवगत कराया जाए, ताकि वे अधिक से अधिक वर्मी कम्पोस्ट एवं सुपर कम्पोस्ट का उपयोग कर सकें। यह बात बुधवार को कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला के निर्देश पर जिला पंचायत सभाकक्ष में बैठक लेते हुए जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र सिंह ठाकुर ने कृषि विभाग एवं सहकारी संस्थाएं, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधिकारियों से कही।

जिपं सीईओ ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एनजीजीबी के तहत गोधन न्याय योजना का सुचारू रूप से संचालन जिले में किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से गोठान में पशुपालकों से गोबर की खरीदी की जा रही है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट एवं सुपर कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। इसलिए जरूरी है कि नियमित समय पर वर्मी कम्पोस्ट एवं सुपर कम्पोस्ट तैयार होकर उसे सोसायटी के माध्यम से बेचा जाए। उन्होंने कहा कि गोठान में ग्रामीणों, पशुपालकों द्वारा जब गोबर बेचा जाता है तो उसके मुताबिक ही उन्हें समय सीमा के भीतर भुगतान किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। किसी भी विक्रेता को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होना चाहिए, अगर इसके बाद भी यह स्थिति निर्मित होती है, तो संबंधित इसके लिए जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा  कि जो समय सीमा वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट के विक्रय करने को लेकर निर्धारित की गई है, उसके मुताबिक ही करें। इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सहकारी समितियोंं एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के बीच तालमेल से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में कृषि विभाग उपसंचालक एम.आर.तिग्गा, सहकारी संस्थाएं उपपंजीयक चंद्रशेखर जायसवाल, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक नोडल अधिकारी अश्विनी पाण्डेय सहित एसएडीओ, सुपरवाइजर आदि उपस्थित रहे।

जिपं सीईओ ने कहा कि स्व सहायता समूह, गोठान समितियों के लिए अंशदान का भुगतान समय सीमा के भीतर किया जाना है, लेकिन इस कार्य में भी लापरवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि गोबर क्रय के बाद एवं वर्मी कम्पोस्ट की विक्रय के बाद जो भी अंशदान समूह एवं गोठान समिति का बनता है उसको दिये जाने के निर्देश दिए, ताकि समूह एवं समिति उसका सदुपयोग कर सकें।

 

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