अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण द्वारा दो वर्षों में नहीं स्थापित की गई एक भी पवन चक्कियां
रायपुर
विंड एनर्जी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण के द्वारा दो वर्षों में किसी भी जिले में पवन चक्कियों की स्थापना नहीं की गई है। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक अरुण वोरा के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दिए।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण के द्वारा विगत दो वर्षों (2019-20 एवं 2021-21) में किसी भी जिले में पवन चक्कियां स्थापित नहीं की गई है इसलिए विंड एनर्जी के लिए राशि खर्च उठने का प्रश्न ही उद्भूत नहीं होता। राज्य में थर्मल पावर प्लांट (छ.ग.रा.वि.उ.क्र. मर्यादित) के द्वारा वर्ष 2019-20 में 18212.34 और वर्ष 2020-21 में 18389.34, केप्टिल पावर प्लांट 2019-20 में 26828.127 और 2020-21 में 25249.549, इंडेपेंडेंट पावर प्लांट 2019-20 में 91714.945 और 2020-21 में 108096.088, बायोमास पॉवर प्लांट 2019-20 में 886.010 और 2020-21 में 1089.570, सोलर पावर प्लांट 2019-20 में 332.80 और 2020-21 में 370.875, लघु जल विद्युत संयंत्र 2019-20 में 139.359 और 2020-21 में 221.542, वृहद जल विद्युत संयंत्र 2019-20 में 236.71 और 2020-21 में 419.18 और को-जनरेशन पावर प्लांट के द्वारा 2019-20 में 56.578 और 2020-21 में 41.909 बिजली उत्पादन किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजली उत्पादन के आधार पर गैरपरपंरागत स्रोत, सोलर, हवा एवं अन्य के प्रतिशत निर्धारण हेतु केंद्र की कोई गाइड लाइन नहीं है। यद्यपि केंद्र शासन द्वारा बिजली खपत के आधार पर अपारंपरिक ऊर्जा क्रय बाध्यता (आरपीओ) सोलर और नॉन सोलर आधारित बिजली का प्रतिशत निर्धारित किया गया है। जिनमें 2019-20 में सोलर द्वारा 7.25 और नॉन सोलर द्वारा 10.25, 2020-21 में सोलर द्वारा 8.75 और 2020-21 में 10..25 बिजली खपत किया गया।
