सीएम योगी ने 6,696 शिक्षकों को दिए नियुक्ति पत्र

लखनऊ 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग के 6696 सहायक शिक्षकों को लखनऊ के लोकभवन में शुक्रवार को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अवैध कमाई बंद हो गई है तो अब कुछ लोग युवाओं को गुमराह करने में लग गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में बहुचर्चित 69 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है। शुक्रवार को इस चयन प्रक्रिया के अवशेष 6,696 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री योगी ने नियुक्ति पत्र बांटे।

 उन्होंने कहा कि 2017 से पहले इसी प्रदेश में कुछ खानदान और कुछ परिवार ऐसे थे, जिनके लिए भर्तियों में वसूली, आजीविका का जरिया हो गया था। कोई भर्ती निकलती थी तो यह लोग झोला लेकर निकल पड़ते थे वसूली के लिए। लेकिन अब इन्हें मालूम हैं कि यह झोला लेकर निकलेंगे तो हमारी एजेंसियां सतर्क हैं और इनके लिए हमने जेलें भी खाली करवा रखी हैं। कहा कि इन चार वर्षों में इन लोगों की अवैध कमाई बंद हो गई है तो अब यह लोग युवाओं को गुमराह करने में लग गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही हम एक और परीक्षा कराने जा रहे हैं, जिसमें आवेदकों की संख्या 30 लाख है। देश की सबसे बड़ी परीक्षा होने जा रही है और विश्वास रखें कोई तिनका नहीं हिलेगा।

योगी ने कहा कि आज जब उत्तर प्रदेश के बेसिक विद्यालयों की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग के राष्ट्रीय मानकों पर श्रेष्ठतम होती जा रही है तो कुछ लोगों को यह सुहा नहीं रहा। कहने को तो 2017 से पहले 1,35000 परिषदीय विद्यालय थे, लेकिन हालत दयनीय थी। स्कूल थे तो शिक्षक नहीं, शिक्षक थे तो छात्र नहीं, छात्र थे तो पढ़ाई का नाम नहीं। पूरा विभाग ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनियमितता में ग्रस्त था। लेकिन सरकार ने दशा सुधार का संकल्प लिया और तब जिन स्कूलों के भवनों पर पीपल और बरगद के पेड़ उगा करते थे आज वहां अक्षर के फूल खिल रहे हैं। बच्चों को दो यूनिफॉर्म मिल रहे हैं, बैग, स्वेटर, पाठ्य सामग्री सब मिल रहा है। गरीब का बच्चा भी अब जूता-मोजा पहन के स्कूल जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बेहतर हुई इन स्थितियों से परेशान विपक्ष जानता है कि अगर गरीब का बच्चा पढ़-लिख लेगा तो इनकी जातिवादी-वंशवादी राजनीति बंद हो जाएगी। यह लोग इसी से दुखी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा का बजट 53 हजार करोड़ प्रतिवर्ष का है। इसका लाभ जनता को मिलना चाहिए, ताकि हमारे स्कूल किसी पब्लिक या कांवेन्ट स्कूल की बराबरी कर सकें।
 

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