इस साल की दूसरी शनिश्चरी अमावस्या कल 10 जुलाई को

इंदौर
 शहर के शनि मंदिर वर्ष की दूसरी शनिश्चरी अमावस्या पर 10 जुलाई को सजेंगे। इस मौके पर सुबह से शाम तक दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता मंदिरों में लगेगा। शहर के पश्चिम क्षेत्र के गजासिन शनि धाम उषानगर में विभिन्ना कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां सुबह पंचामृत स्नान, दोपहर को तिल-तेल से अभिषेक और शाम को शनि चालीसा का पाठ होगा। इस अवसर पर मंदिर में विशेष श्रृंगार  भी किया जाएगा।

शनि साधक दादू महाराज ने बताया कि अभी धनु, मकर, कुंभ राशि के जातकों पर शनिदेव की साढ़े साती और मिथुन, तुला राशि वालों को शनि देव की ढैया चल रही है। ऐसे सभी जातक जिनको साढ़े साती,ढैय्या से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें शनि अमावस्या को सूर्योदय से पूर्व नित्य कर्म करने पश्चात नजदीक के शनि मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर तिल्ली या सरसो तेल से शनि देव का अभिषेक करना लाभदायक होता है। साथ ही शनि मंत्र की 11,21 और 51 माला का जाप करना लाभदायक है। शनि पीढ़ा से राहत के लिए तुला दान करना अर्थात अपने वजन बराबर लोहा, सरसो तेल, काले तिल, उड़द, स्टील बर्तन, तिल्ली, तेल का दान करना चाहिए। इसके अलावा लोहे के पात्र में तेल भरकर अपना चेहरा देखकर और निशक्त को भोजन, वस्त्र का दान करे। मंदिर समिति के अनुसार इस मौके पर शनि प्रसाद पुस्तिका का वितरण भी दिनभर मंदिर में होगा।

वर्ष की अंतिम शनिश्चरी अमावस्या चार दिसंबर को

वर्ष 2021 में तीन शनिश्चरी अमावस्या है। इनमें से वर्ष की पहली शनिश्चरी अमावस्या 13 मार्च को थी जबकि अंतिम चार दिसंबर को होगी। आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार शनिवार को आने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहते हैं। इस दिन शनि से पीड़ित व्यक्तियों के लिए दान का महत्व बढ़ जाता है। शनि से प्रभावित व्यक्ति को कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है। शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करना लाभप्रद बताया गया है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि का कुप्रभाव हो उन्हे शनि के पैरों की तरफ देखना चाहिए।

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