आज जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्ट BRI पर अहम बैठक करेगा ड्रैगन, G-7 के B3W वाले प्लान से घबराया चीन? 

 बीजिंग 
G7 के बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड (B3W) प्लान से चीन घबरा गया है। यही वजह है कि जी-7 देशों की बैठक के तुरंत बाद चीन ने जिनपिंग के ड्रीम प्रोजेक्ट बीआरआई पर एक अहम बैठक बुलायी है। अपने महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर चर्चा के लिए चीन ने आज यानी बुधवार को एशिया प्रशांत देशों के मंत्रियों का एक सम्मेलन आयोजित किया है। अमेरिका के नेतृत्व वाले जी-7 देशों द्वारा बीजिंग की अरबों डॉलर की अवसंरचना विकास पहल के मुकाबले 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड' (बी3डब्ल्यू) योजना की घोषणा किये जाने के बाद इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। चीन BRI के जरिए गरीब और छोटे मुल्कों को विकास का सपना दिखाकर लोन जाल में फंसाने में जुटा है। 

'ग्रुप ऑफ सेवन (जी7) में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, फ्रांस और जापान शामिल हैं। जी7 ने अपने लंदन सम्मेलन में 12 जून को चीन के बढ़ते प्रभाव की काट के तौर पर बी3डब्ल्यू योजना शुरू करने पर सहमति जताई थी, जिसके तहत विकासशील देशों के लिये अवसंरचना योजना की पेशकश की जाएगी, जो बीआरआई की प्रतिस्पर्धी होगी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजान ने मंगलवार को यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि 'बेल्ट एंड रोड कोऑपरेशन' पर स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी वीडियो लिंक के जरिये एशिया प्रशांत उच्च स्तरीय सम्मलेन की अध्यक्षता करेंगे, जिसका थीम “सतत सुधार के लिये महामारी से मुकाबला करने को सहयोग करना” है।

उन्होंने कहा कि एशिया प्रशांत के प्रासंगिक देशों के विदेश या वित्त मंत्रियों और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों समेत 30 से ज्यादा पक्ष बैठक में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें विविध क्षेत्रों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं,जो बीआरआई को सभी पक्षों द्वारा दी जा रही उच्च प्राथमिकता व समर्थन को परिलक्षित करता है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा सत्ता में आने के बाद 2013 में शुरू की गई अरबों डॉलर की बीआरआई का लक्ष्य भू-नेटवर्क और समुद्री मार्ग से दक्षिणपूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ना है। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बीआरआई की ध्वजवाहक परियोजना है। भारत ने सीपीईसी को लेकर चीन से आपत्ति दर्ज कराई है, क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है।

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