एक लाख और अधिक आबादी वाले शहरों को 24 घंटे निर्बाध बिजली का कानून

लखनऊ

एक लाख और उससे अधिक आबादी वाले शहरों और महानगरों में 24 घंटे बिजली दिए जाने की व्यवस्था किए जाने की अधिसूचना ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने जारी किया है। केंद्र सरकार का यह फैसला प्रदूषण स्तर को न्यूनतम स्तर पर लाने के उद्देश्य से है। नये कानून के तहत राज्यों को बिजली आपूर्ति की ट्रिपिंग मुक्त व्यवस्था करनी होगी। निर्माण संबंधी कार्यों के लिए अस्थाई कनेक्शन के नियम भी सरल करने होंगे ताकि कुछ समय के लिए जेनरेटर का प्रयोग किए जाने वाले काम भी बिजली के माध्यम से ही हों।

ऊर्जा मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना के माध्यम से कहा है कि प्रदूषण स्तर को देखते हुए पांच साल के अंदर डीजल जनित जेनरेटर हटाकर रिन्युअल बैटरी बैकअप रखने का प्रावधान किया जाए। राज्यों में इन व्यवस्थाओं को लागू कराने की जिम्मेदारी राज्यों के विद्युत नियामक आयोगों को दी गई है। नियामक आयोग इसके लिए रेगुलेशन बनाएंगे। पांच साल के अंदर डीजल जेनरेटर हटाने की समय सीमा में नियामक आयोग इस समय में बदलाव कर सकते हैं। विद्युत व्यवधान पर सूचकांक की मानीटरिंग भी विद्युत नियामक आयोग को करनी है। तीन मिनट या उससे अधिक समय की ट्रिपिंग को व्यवधान माना जाएगा। नये कानून में यह भी कहा गया है कि निर्माण क्रियाकलापों में डीजल जनित जनरेटर को रोकने के लिए जहां विद्युत वितरण मेन्स उपलब्ध हैं अब वहां अस्थाई कनेक्शन 48 घंटे के अंदर देना होगा जहां विद्युत वितरण मेंस उपलब्ध नहीं हैं वहां पर सात दिन के अंदर देना होगा।
 
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि केंद्र द्वारा बनाए गए नए कानून से एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहरों को नये कानून के हिसाब से 24 घंटे निर्बाध बिजली देने के लिए नो ट्रिपिंग जोन बनाना होगा। आगामी दिनों में जब नियामक आयोग इसके लिए रेगुलेशन तैयार करेगा उस समय उपभोक्ताओं की बातें रखी जाएंगी। यदि तय आबादी वाले शहरों को 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी तो उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। निश्चित तौर पर प्रदूषण कम होगा।

 

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