उच्च शिक्षा विभाग: प्रभारी प्राचार्यों की सीआर कलेक्टर लिखेंगे

भोपाल
राज्य के 516 में से 450 कॉलेज प्रभारी प्राचार्य चला रहे हैं। शेष नियमित प्राचार्यों की गोपनीय चरित्रावली को कलेक्टर लिखेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के बाद प्रभारी प्राचार्यों की सीआर भी कलेक्टर लिखेंगे। वहीं प्रभारी प्राचार्य कर्मचारी और अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। विभाग 30 जून तक सभी की सीआर जमा कराने के लिए आदेशित किया है।  विभाग ने कॉलेजों में पदस्थ अधिकारियोें और कर्मचारियों के गोपनीय चरित्रावली सावधानी से लिखने के आदेश जारी किए हैं।

सीआर में अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा शैक्षणिक व अशैक्षणिक  संचालित कार्योें एवं व्यवहार संबंधी जानकारी भरी जाएगी। प्रभारी प्राचार्य की सीआर कलेक्टर लिखेंगे। क्योंकि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की सीआर लिखने का अच्छा अनुभव होता है। इसलिए वे प्राचार्यों की सीआर बेहतर तरीके से लिख पाएंगे। वहीं प्रभारी प्राचार्यों को कर्मचारी और अधिकारियों की सीआर काफी सावधानी से लिखना होगा, क्योंकि पूर्व में कई बार सीआर लिखने में प्राचार्य गलती कर चुके हैं, जिन्हें सुधारने में विभागायुक्त को काफी परेशानी उठाना पडी थीं। प्रभारी प्राचार्य के गोपनीय प्रतिवेदन क्षेत्रीय संचालक के माध्यम से सीधे आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग को भेज जाएंगे।

प्राचार्यों को सीआर लिखते समय हर कॉलम पर गंभीरता से मनन कर भरना होगा। मूल्यांकन प्रत्रक में गतिविधियों पर ग्रेडिंग स्वीकृति के साथ प्रतिवेदकों को टीम वाले पन्ने पर अपना नाम और पद लिखना होगा। गं्रथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारी को नये प्रोफार्मा में गोपनीय चारित्रावली जमा करना होगी। एपीआई कॉलम में अंक अथवा निरंक लिखना होगा। नियमित प्राचार्य होने पर अधिकारी की सीआर को क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को भेजना होगा। कांट-छांट पर समीक्षक करेंगे।

प्राचार्य सीआर को अंक साफ और स्पष्ट शब्दों में लिखें।  उसमें काट-छांट और अभिलेखों पर ओवर राईटिंग नहीं चलेगी। ऐसा होने पर उन्हें आंतरिक गुणवत्ता एवं मूल्यांकन प्रकोष्ठ के अंकों में परिवर्तन करने की दिशा में समीक्षक को ओवर राइटिंग वाले स्थान पर खुद हस्ताक्षर कर सत्यापन करना होगा। ताकि सीआर में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हो।

प्रभारी प्राचार्य को ज्यादा प्रशासनिक अनुभव नहीं होता है। उनके द्वारा कॉलेजों में शैक्षणिक संचालन में कई गड़बड़ियां पूर्व में सामने आई हैं। ऐसे में जब कलेक्टर निष्पक्ष होकर उनकी सीआर लिखेंगे तो कई प्रभारी प्रचार्यों के आचरण, व्यवहार और नीतिगत निर्णय लेने की क्षमता की निष्पक्ष जानकारी आएगी। कलेक्टर के सीआर लिखने से यह तो तय है कि प्रभारी प्रचार्यों की धड़कनें बढ़ सकती हैं।

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