मानसिक तनाव का कारण बता सुनवाई में नहीं पहुंचा मेहुल

डोमिनिका
पीएनबी से 14 हजार करोड़ की धोखाधड़ी में भगोड़ा घोषित हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने प्रत्यर्पण से बचने के लिए नया पैंतरा अपनाया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट में अवैध प्रवेश मामले की सुनवाई में सोमवार को मेहुल मानसिक तनाव का कारण बताकर पेश नहीं हुआ। वहीं सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकीलों में भारत की वकील हरप्रीत गियाना भी शामिल हुईं।

मेहुल का पिछले दो सप्ताह से फ्रेंडशिप अस्पताल में इलाज चल रहा है। इसके बाद मुख्य मजिस्ट्रेट केरेट जॉर्ज ने मेहुल को 17 जून को आगे की रिमांड के लिए पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट अब 25 जून को इस मामले में सुनवाई करेगा।

 मेहुल के ब्रिटेन में वकील माइकल पोलाक ने डोमिनिकन कोर्ट की सुनवाई में भारतीय पक्ष के शामिल होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इससे साफ होता है कि चोकसी को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के डोमिनिका से सीधे भारत को सौंपने की योजना थी।

पोलाक ने कहा, चोकसी के खिलाफ बहुत प्रोपेगेंडा बनाया गया है। उसे कई दिनों तक वकीलों से भी दूर रखा गया। मौजूदा हालात से साफ दिख रहा है कि भारत किसी भी तरह चोकसी को हासिल करना चाहता है। एंटीगुआ में उसके भारत प्रत्यर्पण का मामला विचाराधीन है।

इस मामले में सुनवाई 5 से 6 वर्ष तक चल सकती है। हम एंटीगुआ की पुलिस से मामले की रिपेार्ट मांग रहे हैं मगर दी नहीं जा रही। उन्होंने कहा, मेहुल के पास एंटीगुआ की नागरिकता है और उनके पास सभी अधिकार हैं। इसमें एंटीगुआ के प्रधानमंत्री कोई फैसला नहीं ले सकते, यह एक कानूनी मामला है।

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