नगरों में बाढ़ एवं जल-भराव की स्थिति से बचने करें जरूरी तैयारी – मंत्री भूपेन्द्र सिंह

 भोपाल

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा है कि नगरीय क्षेत्रों में वर्षा के कारण जल-भराव या बाढ़ जैसी स्थितियों को रोकने एवं वर्षा ऋतु में नगर की सेवाओं/व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से बनाये रखने का दायित्व नगरीय निकायों का है। इसी तारतम्य में आगामी वर्षा ऋतु के संबंध में सभी नगरीय क्षेत्रों के अंतर्गत विभिन्न तैयारियाँ आवश्यक हैं, ताकि वर्षा ऋतु के दौरान नगरीय क्षेत्र में किसी प्रकार की आपदा की स्थिति निर्मित न हो और नागरिकों को परेशानी न हो।

सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नगरीय क्षेत्र में नाले, स्टार्म वाटर ड्रेन एवं सीवरेज प्रणाली की साफ-सफाई सुनिश्चित करें, ताकि वर्षा काल में निचले क्षेत्रों में स्थानीय जल-प्लावन या गंदे पानी के भराव की समस्या निर्मित न हो। विभिन्न स्थलों पर एकत्रित जल में कीटनाशक एवं रसायनों का छिड़काव सुनिश्चित किया जाये। अतिवृष्टि के कारण उत्पन्न हुई गंदगी के कारण संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना रहती है। अत: वर्षा ऋतु के दौरान साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाये तथा गंदगी वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव सुनिश्चित करें।

नगरीय क्षेत्र में जर्ज भवन के मालिक/उपयोगकर्ता के संदर्भ में अधिनियम-1956 एवं अधिनियम-1961 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। निकाय क्षेत्र के अंतर्गत अगर कोई पुल-पुलिया जर्जर अवस्था में हो, तो उनके समुचित रख-रखाव की कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाये। सड़कों के रख-रखाव की समीक्षा भी की जाये एवं समुचित कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। जिस निकाय में जल-प्रदाय या सीवरेज परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं, वहाँ कान्ट्रेक्ट के प्रावधान अनुसार सड़क मरम्मत करायें।

निकाय के पास बाढ़ नियंत्रण के लिये पम्प, नाव, जनरेटर, प्लड लाइट्स इत्यादि उपकरण अगर हों, तो उसे चालू हालत में रखा जाये। बचाव के लिये अन्य आवश्यक सामग्री (जहाँ जैसी आवश्यकता हो) एवं उपकरण की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाये। विशेषकर ऐसे नगरीय निकाय, जो बड़ी नदियों के किनारे बसे हैं, जहाँ पूर्व में बाढ़/जल-प्लावन की स्थितियाँ निर्मित होती रही हैं, वहाँ पर पूर्व अनुभवों के आधार पर विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। बाढ़ की स्थिति में नागरिकों के ठहरने के लिये उपयुक्त भवन चिन्हित किये जायें, ताकि किसी क्षेत्र में जल-प्लावन की स्थिति में ऐसे भवनों मे लोगों को स्थानांतरित किया जा सके। बचाव कार्य के लिये कलेक्टर के मार्गदर्शन में अन्य आवश्यक व्यवस्था भी सुनिश्चित करें। इस कार्य के लिये नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर जिला कलेक्टर को इसकी सूचना भी दें एवं आवश्यकतानुसार उनके निर्देशन में कार्य करें।

बाढ़ या अतिवृष्टि से शहरी अधोसंरचना क्षतिग्रस्त होने पर उसके मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिये आवश्यक प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से विभाग को प्रस्तुत करें, ताकि राज्य आपदा राहत राशि की उपलब्धता के लिये कार्यवाही की जा सके। सम्पूर्ण कार्यवाही 15 जून के पहले सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।

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